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Wednesday, June 15, 2011

आज और कल

यही वह समय है

जब वक़्त के गलियारे से

गुज़रते हुए

अपने बीते हुए "कल" का किवाड़

अपने पीछे बंद कर दें

और, आने वाले कल को

अपनाने के लिए 'आज' का दरवाज़ा खुला रखें

आज का वक़्त

उस अध्ययन में बिताएं

तो फिर शायद वो ग़लतियां

सामने न आए, जो

कल के किवाड़ के पीछे

हम बंद कर आए हैं.

देवी नागरानी

2 comments:

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

सटीक सीख देती रचना ...

mridula pradhan said...

शायद वो ग़लतियां
सामने न आए, जो
कल के किवाड़ के पीछे
हम बंद कर आए हैं
khoobsurti ke sath shikcha deti hui.