नाम तेरा नाम मेरा कर रहा कोई और है
खालीपन जीवन का हर पल
भर रहा कोई और है-1
क्या मेरी पहचान है, क्या जात क्या औकात क्या
नेक नामी संग मेरे
कर रहा कोई और है-2
रफ़्ता रफ़्ता चलते चलते नक्शे पा जो भी मिले
हमक़दम हो हर क़दम पग
धर रहा कोई और है-3
पंख घायल है परिंदा ऊँचा उड़ सकता नहीं
बेख़बर बेकस वो है, पर
बाख़बर कोई और है-4
जीना मरना जागना सोना लगे सपना मुझे
मेरे भीतर जीते जी क्यों डर
रहा कोई और है-5
तुम लिखो बिल्कुल लिखो पर यह हक़ीक़त याद हो
सोच तेरी शब्द उसमें भर
रहा कोई और है
पार कश्ती जो लगाए सब उसे है जानते
बेख़बर ‘देवी’ मगर रखता ख़बर कोई
और है-७
देवी नागरानी
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