भूख.एक बीमारी, एक लाचारी है
यह एक नग्न अहसास है, जो
औरों के मुंह से निवाला तो छीन
लेती है
लेकिन अपना पेट नहीं भर पाती.
गुरबत को निगल कर भी
डकार तक नहीं लेती ...
शायद उसकी हालत
उस कंगाल से भी बदतर है
जो भूख के लिए भीख तो मांगता है, लेकिन
अपनी ही हवस की भूख के आगे
लाचार, मोहताज हो, घुटने टेककर
बीते पलों से
अपने ही जीवन की भीख माँगता
फिरता है
और वे पल,
शायद उसकी हवस की भूख का
पेट न भर पाए...
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