जीवन के तट पर-मेरे मन की सइरा में सफ़र करते जब मेरे पाँव थक जाते हैं तब कलम का सहारा ले कर शबनमी सपने बुनने लगती हूँ. प्यास की आस बंध जाती है, सफर बाकी कुछ और.... सिर्फ थोड़ा और.....
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5/12/2026
आई है ख़ुशियों की भोर
आई है ख़ुशियों की भोर
मस्त फ़िजाँ मेँ भीनी भोर
ख़ुशबू देती चारों ओर
बादल गरजे घनघन घन घन
छाई घटा कारी घन घोर
रिमझिम रिमझिम पानी बरसे
प्यासा मोर मचाए शोर
कळ कळ कळ कळ पानी बहता
प्यास बुझाए प्यासे ढोर
ऊँची उड़ान भरे मन ऐसे
जैसे पतँग की कोई डोर
मदमाती मस्ती में है देवी
आई है ख़ुशियों की भोर
4/26/2026
मेरी छत, मेरी छत
निगाहों से कोई तो ढूंढो मेरी छत
अरे कोई ढूंढो मेरी छत, मेरी छत
चली जाने कैसी विदूषित हवाएं
उड़ा कर चली वो मेरी छत, मेरी छत
पनाह पा रहा था जो दामन वहीं पर
उड़ा कर चली वो मेरी छत, मेरी छत
बुने ताने बाने जो अहसास के वो
उड़ा कर चली वो मेरी छत, मेरी छत
जो पलकों पे अश्कों के मोती बिखेरे
बहा कर चली वो मेरी छत, मेरी छत
अरे कोई ढूंढो मेरी छत, मेरी छत
चली जाने कैसी विदूषित हवाएं
उड़ा कर चली वो मेरी छत, मेरी छत
पनाह पा रहा था जो दामन वहीं पर
उड़ा कर चली वो मेरी छत, मेरी छत
बुने ताने बाने जो अहसास के वो
उड़ा कर चली वो मेरी छत, मेरी छत
जो पलकों पे अश्कों के मोती बिखेरे
बहा कर चली वो मेरी छत, मेरी छत
3/22/2026
आई है ख़ुशियों की भोर
मस्त फ़िजाँ मेँ भीनी भोर
ख़ुशबू देती चारों
ओर
बादल गरजे घनघन घन
घन
छाई घटा कारी घन घोर
रिमझिम रिमझिम पानी
बरसे
प्यासा मोर मचाए शोर
कळ कळ कळ कळ पानी
बहता
प्यास बुझाए प्यासे
ढोर
ऊँची उड़ान भरे मन
ऐसे
जैसे पतँग की कोई
डोर
मदमाती मस्ती है देवी
आई है ख़ुशियों की
भोर
8/29/2011
4/01/2011
धूप में निकला न कर
ग़ज़ल
डरता है परछाई से तू गर
धूप में निकला न कर
तू समय की शाख से
वक़्त कुछ माँगा न कर
ठहरे पानी में ऐ नादाँ
संग यूँ फेंका न कर
आँच में अपने ग़मों की
ऐसे तो पिघला न कर
चेहरे पे चेहरा लगाकर
आईने बदला न कर
सोच की गलियों में जाकर
सीखे बिन लौटा न कर
देवी नागरानी
डरता है परछाई से तू गर
धूप में निकला न कर
तू समय की शाख से
वक़्त कुछ माँगा न कर
ठहरे पानी में ऐ नादाँ
संग यूँ फेंका न कर
आँच में अपने ग़मों की
ऐसे तो पिघला न कर
चेहरे पे चेहरा लगाकर
आईने बदला न कर
सोच की गलियों में जाकर
सीखे बिन लौटा न कर
देवी नागरानी
गीत मेरे हैं बिन आवाज़
ग़ज़लः
बजे न टूटे दिल का साज़
गीत मेरे हैं बिन आवाज़
परदे के पीछे था साज़
फाश हुआ रातों में राज़
कहाँ हैं कोए अक्स वो सारे
जिन पर शीशों को था नाज़
ज़िंदा रखना वो उम्मीदें
बेपर करना है परवाज़
जान न पाते वो औक़ात
ढाश न होता गर वो राज़
ख़ुशबू की नीलामी हर दिन
माली चमन का है हमराज़
देवी नागरानी
बजे न टूटे दिल का साज़
गीत मेरे हैं बिन आवाज़
परदे के पीछे था साज़
फाश हुआ रातों में राज़
कहाँ हैं कोए अक्स वो सारे
जिन पर शीशों को था नाज़
ज़िंदा रखना वो उम्मीदें
बेपर करना है परवाज़
जान न पाते वो औक़ात
ढाश न होता गर वो राज़
ख़ुशबू की नीलामी हर दिन
माली चमन का है हमराज़
देवी नागरानी
3/06/2011
मछली जल की रानी है
मछली जल की रानी है
जीवन उसका पानी है
हाथ लगाओ डर जायेगी
बाहर निकालो मर जायेगी
देवी नागरानी
जीवन उसका पानी है
हाथ लगाओ डर जायेगी
बाहर निकालो मर जायेगी
देवी नागरानी
एक कौआ प्यासा था
एक कौआ प्यासा था
जग में थोड़ा पानी था
कौआ डाला कँकर
पानी आया ऊपर
कौआ पिया पानी
ख़तम हो गई कहानी
देवी नागरानी
जग में थोड़ा पानी था
कौआ डाला कँकर
पानी आया ऊपर
कौआ पिया पानी
ख़तम हो गई कहानी
देवी नागरानी
ऐ री बंदरिया मेरी
ऐ री बंदरिया मेरी
पूंछ कहाँ है तेरी
ढूँढ उसे यूँ बाहर भीतर
नींद उड़ी है मेरी
देवी नागरानी
पूंछ कहाँ है तेरी
ढूँढ उसे यूँ बाहर भीतर
नींद उड़ी है मेरी
देवी नागरानी
2/18/2011
आओ राजा आओ रानी
आओ राजा आओ रानी
तुम्हें सुनाऊँ एक कहानी
एक था हाथी, एक थी हाथिन
दोनों निकले पीने पानी
हाथिन ने जब पी लिया जल
हाथी ने कुछ मन में ठानी
पानी भरकर सूड़ में अपनी
दोनों राह चले पहचानी
चलते चलते राह में देखा
पानी बिन इक चिड़िया प्यासी
पास में उसके जा हाथी ने
बरसाया सब सूड़ का पानी
ख़ुश हुए सब देखने वाले
ताली बजा बजाकर नाचे
"हाथी वन का बना है राजा
हाथिन उसकी हुई है रानी"
आओ राजा आओ रानी
तुम्हें सुनाऊँ एक कहानी
देवी नागरानी
2/17/2011
2/01/2011
रिशतों में है सौदेबाज़ी

रिशतों में है सौदेबाज़ी
कोई नहीं है किससे राज़ी.
तुम गर सेर सवा मैं भी हूँ
समझो भल पर कम नहीं हूँ
तू मेरा मैं तेरा काजी
कोई नहीं है किससे राज़ी
"तेरा मेरा" करके बढ़ाई
दिल में दरार की यह खाई
इक दूजे के वो सौदाई
कोई नहीं है किससे राज़ी
नहीं शिकायत शिकवा कोई
कौन यहाँ है दिलबर देवी
लुटी लुटी है सारी खुदाई
कोई नहीं है किससे राज़ी
देवी नागरानी
कोई नहीं है किससे राज़ी.
तुम गर सेर सवा मैं भी हूँ
समझो भल पर कम नहीं हूँ
तू मेरा मैं तेरा काजी
कोई नहीं है किससे राज़ी
"तेरा मेरा" करके बढ़ाई
दिल में दरार की यह खाई
इक दूजे के वो सौदाई
कोई नहीं है किससे राज़ी
नहीं शिकायत शिकवा कोई
कौन यहाँ है दिलबर देवी
लुटी लुटी है सारी खुदाई
कोई नहीं है किससे राज़ी
देवी नागरानी
1/22/2011
1/17/2011
आओ राजा आओ रानी
आओ राजा आओ रानी
तुम्हें सुनाऊँ एक कहानी
एक था हाथी, एक थी हाथिन
दोनों निकले पीने पानी
हाथिन ने जब पी लिया जल
हाथी ने कुछ मन में ठानी
पानी भरकर सूड़ में अपनी
दोनों राह चले पहचानी
चलते चलते राह में देखा
पानी बिन इक चिड़िया प्यासी
पास में उसके जा हाथी ने
बरसाया सब सूड़ का पानी
ख़ुश हुए सब देखने वाले
ताली बजा बजाकर नाचे
"हाथी वन का बना है राजा
हाथिन उसकी हुई है रानी"
आओ राजा आओ रानी
तुम्हें सुनाऊँ एक कहानी
देवी नागरानी
तुम्हें सुनाऊँ एक कहानी
एक था हाथी, एक थी हाथिन
दोनों निकले पीने पानी
हाथिन ने जब पी लिया जल
हाथी ने कुछ मन में ठानी
पानी भरकर सूड़ में अपनी
दोनों राह चले पहचानी
चलते चलते राह में देखा
पानी बिन इक चिड़िया प्यासी
पास में उसके जा हाथी ने
बरसाया सब सूड़ का पानी
ख़ुश हुए सब देखने वाले
ताली बजा बजाकर नाचे
"हाथी वन का बना है राजा
हाथिन उसकी हुई है रानी"
आओ राजा आओ रानी
तुम्हें सुनाऊँ एक कहानी
देवी नागरानी
1/05/2011
न लोहा बन सके सोना
वो पारस क्या जिसे छूकर
न लोहा बन सके सोना
विकारों मैं है मन मैला
शरीरों को है क्या धोना?
यह रिश्तों की बची है राख
नए फिर बीज क्यों बोना?
सजा कर दिल में बर्बादी
किया आबाद हर कोना
न ऐसी चाह रख दिल में
जहाँ पा कर पड़े खोना
ख़ुशी मातम मनाती जब
ग़मों को आ गया रोना
मुझे दे पाक दिल मौला
न धन मांगूँ न मैं सोना
यह जीवन कैसा है देवी
सलीबों को जहाँ ढोना
देवी नागरानी
न लोहा बन सके सोना
विकारों मैं है मन मैला
शरीरों को है क्या धोना?
यह रिश्तों की बची है राख
नए फिर बीज क्यों बोना?
सजा कर दिल में बर्बादी
किया आबाद हर कोना
न ऐसी चाह रख दिल में
जहाँ पा कर पड़े खोना
ख़ुशी मातम मनाती जब
ग़मों को आ गया रोना
मुझे दे पाक दिल मौला
न धन मांगूँ न मैं सोना
यह जीवन कैसा है देवी
सलीबों को जहाँ ढोना
देवी नागरानी
1/02/2011
जीवन एक पहेली
जीवन का है अर्थ अनोखा
फिर बिन अर्थ बिताए क्यों ?
बसँत ऋतू में बहार आई
फिर कलियाँ मुरझाए क्यों ?
घनी है जीवन पेड़ की छाया
नीरस पल फिर आए क्यों ?
देह विदेह के अँतर घट में
घने अँधेरे छाए क्यों ?
रचना की सुँदरता में ये
कुरूप पल है आए क्यों ?
सुलझी है हर गुत्थी फिर भी
उलझन के ये साए क्यों ?
कोयल स्वयँ तो काली काली
मीठी कूक सुनाए क्यों ?
देवी नागरानी
फिर बिन अर्थ बिताए क्यों ?
बसँत ऋतू में बहार आई
फिर कलियाँ मुरझाए क्यों ?
घनी है जीवन पेड़ की छाया
नीरस पल फिर आए क्यों ?
देह विदेह के अँतर घट में
घने अँधेरे छाए क्यों ?
रचना की सुँदरता में ये
कुरूप पल है आए क्यों ?
सुलझी है हर गुत्थी फिर भी
उलझन के ये साए क्यों ?
कोयल स्वयँ तो काली काली
मीठी कूक सुनाए क्यों ?
देवी नागरानी
12/25/2010
कहीं है प्यार आता क्यों ?
चले जिस राह पर बरसों
उन्हें अनजान पाता क्यों ?
कहीं गैरों में अपनापन
कहीं अपना न भाता क्यों ?
बना जो ग़ैर है अपना
उसे फिर से बुलाता क्यों ?
कहीं नफ़रत न कर पाएँ
कहीं है प्यार आता क्यों ?
छलक पड़ते जो आसूँ वो
तू मुझसे है छुपाता क्यों?
खड़ी जिस शाख पर देवी
वहीं आरी चलाता क्यों ?
देवी नागरानी
उन्हें अनजान पाता क्यों ?
कहीं गैरों में अपनापन
कहीं अपना न भाता क्यों ?
बना जो ग़ैर है अपना
उसे फिर से बुलाता क्यों ?
कहीं नफ़रत न कर पाएँ
कहीं है प्यार आता क्यों ?
छलक पड़ते जो आसूँ वो
तू मुझसे है छुपाता क्यों?
खड़ी जिस शाख पर देवी
वहीं आरी चलाता क्यों ?
देवी नागरानी
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