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5/12/2026

आई है ख़ुशियों की भोर

आई है ख़ुशियों की भोर मस्त फ़िजाँ मेँ भीनी भोर ख़ुशबू देती चारों ओर बादल गरजे घनघन घन घन छाई घटा कारी घन घोर रिमझिम रिमझिम पानी बरसे प्यासा मोर मचाए शोर कळ कळ कळ कळ पानी बहता प्यास बुझाए प्यासे ढोर ऊँची उड़ान भरे मन ऐसे जैसे पतँग की कोई डोर मदमाती मस्ती में है देवी आई है ख़ुशियों की भोर

4/26/2026

मेरी छत, मेरी छत

निगाहों से कोई तो ढूंढो मेरी छत


अरे कोई ढूंढो मेरी छत, मेरी छत



चली जाने कैसी विदूषित हवाएं

उड़ा कर चली वो मेरी छत, मेरी छत



पनाह पा रहा था जो दामन वहीं पर

उड़ा कर चली वो मेरी छत, मेरी छत



बुने ताने बाने जो अहसास के वो

उड़ा कर चली वो मेरी छत, मेरी छत



जो पलकों पे अश्कों के मोती बिखेरे

बहा कर चली वो मेरी छत, मेरी छत


3/22/2026

आई है ख़ुशियों की भोर

मस्त फ़िजाँ मेँ भीनी भोर

ख़ुशबू देती चारों ओर

 

बादल गरजे घनघन घन घन

छाई घटा कारी घन घोर

 

रिमझिम रिमझिम पानी बरसे

प्यासा मोर मचाए शोर

 

कळ कळ कळ कळ पानी बहता

प्यास बुझाए प्यासे ढोर

 

ऊँची उड़ान भरे मन ऐसे

जैसे पतँग की कोई डोर

 

मदमाती मस्ती है देवी

आई है ख़ुशियों की भोर


8/29/2011

मेरी पोती निकिता नागरानी

मेरे बचपन का अक्स

गुड़िया रानी, गुड़िया रानी

तू क्यों भई उदास

बन संवर कर आज है जाना

तुझे पिया के पास

देवी नागरानी


4/01/2011

धूप में निकला न कर

ग़ज़ल

डरता है परछाई से तू गर
धूप में निकला न कर

तू समय की शाख से
वक़्त कुछ माँगा न कर

ठहरे पानी में ऐ नादाँ
संग यूँ फेंका न कर

आँच में अपने ग़मों की
ऐसे तो पिघला न कर

चेहरे पे चेहरा लगाकर
आईने बदला न कर

सोच की गलियों में जाकर
सीखे बिन लौटा न कर
देवी नागरानी

गीत मेरे हैं बिन आवाज़

ग़ज़लः

बजे न टूटे दिल का साज़
गीत मेरे हैं बिन आवाज़

परदे के पीछे था साज़
फाश हुआ रातों में राज़

कहाँ हैं कोए अक्स वो सारे
जिन पर शीशों को था नाज़

ज़िंदा रखना वो उम्मीदें
बेपर करना है परवाज़

जान न पाते वो औक़ात
ढाश न होता गर वो राज़

ख़ुशबू की नीलामी हर दिन
माली चमन का है हमराज़
देवी नागरानी

3/06/2011

मछली जल की रानी है

मछली जल की रानी है
जीवन उसका पानी है
हाथ लगाओ डर जायेगी
बाहर निकालो मर जायेगी
देवी नागरानी

एक कौआ प्यासा था

एक कौआ प्यासा था
जग में थोड़ा पानी था
कौआ डाला कँकर
पानी आया ऊपर
कौआ पिया पानी
ख़तम हो गई कहानी
देवी नागरानी

ऐ री बंदरिया मेरी

ऐ री बंदरिया मेरी
पूंछ कहाँ है तेरी
ढूँढ उसे यूँ बाहर भीतर
नींद उड़ी है मेरी
देवी नागरानी

2/18/2011

आओ राजा आओ रानी




आओ राजा आओ रानी
तुम्हें सुनाऊँ एक कहानी
एक था हाथी, एक थी हाथिन
दोनों निकले पीने पानी

हाथिन ने जब पी लिया जल
हाथी ने कुछ मन में ठानी
पानी भरकर सूड़ में अपनी
दोनों राह चले पहचानी

चलते चलते राह में देखा
पानी बिन इक चिड़िया प्यासी
पास में उसके जा हाथी ने
बरसाया सब सूड़ का पानी

ख़ुश हुए सब देखने वाले
ताली बजा बजाकर नाचे
"हाथी वन का बना है राजा
हाथिन उसकी हुई है रानी"

आओ राजा आओ रानी
तुम्हें सुनाऊँ एक कहानी
देवी नागरानी

2/17/2011

तितली उड़ी


तितली उड़ी
अपने नन्हें भाई "सँभव शर्मा" को सुनाते हुए

तितली उड़ी, बस में चढ़ी
सीट नहीं मिली
ड्राइवर ने कहा
आजा मेरे पास
तितली बोली " हट बदमास"
मैं तो चली वापस आकाश.
प्रसुतकर्ताः
स्तुति शर्मा

एक मुर्गा चश्मे दीदम


एक मुर्गा चश्मे दीदम
चलते चलते थक गया
लाओ चाकू काटो गर्दन
फिर भी वो चलने लगा
कलमकारःस्तुति शर्मा
(Grand-daughter of Shri R.P.Sharma)

मेरे बचपन का अक्स

मेरी पोती निकिता नागरानी
गुड़िया रानी, गुड़िया रानी
तू क्यों भई उदास
बन संवर कर आज है जाना
तुझे पिया के पास
देवी नागरानी

2/01/2011

रिशतों में है सौदेबाज़ी



रिशतों में है सौदेबाज़ी
कोई नहीं है किससे राज़ी.

तुम गर सेर सवा मैं भी हूँ
समझो भल पर कम नहीं हूँ

तू मेरा मैं तेरा काजी
कोई नहीं है किससे राज़ी

"तेरा मेरा" करके बढ़ाई
दिल में दरार की यह खाई

इक दूजे के वो सौदाई
कोई नहीं है किससे राज़ी

नहीं शिकायत शिकवा कोई
कौन यहाँ है दिलबर देवी

लुटी लुटी है सारी खुदाई
कोई नहीं है किससे राज़ी
देवी नागरानी

1/22/2011

निकिता नागरानी

जन्म: २0 may 2006

एक गुडिया रानी थी
लगती बड़ी सायानी थी
हाथ से सबकुछ छीने ऐसे
कौवों की वो रानी थी

1/17/2011

मेरी प्रार्थना

My God is so Great
So strong and so mighty
There is nothing my God Can not do
For You, For You

आओ राजा आओ रानी

आओ राजा आओ रानी
तुम्हें सुनाऊँ एक कहानी
एक था हाथी, एक थी हाथिन
दोनों निकले पीने पानी

हाथिन ने जब पी लिया जल
हाथी ने कुछ मन में ठानी
पानी भरकर सूड़ में अपनी
दोनों राह चले पहचानी

चलते चलते राह में देखा
पानी बिन इक चिड़िया प्यासी
पास में उसके जा हाथी ने
बरसाया सब सूड़ का पानी

ख़ुश हुए सब देखने वाले
ताली बजा बजाकर नाचे
"हाथी वन का बना है राजा
हाथिन उसकी हुई है रानी"

आओ राजा आओ रानी
तुम्हें सुनाऊँ एक कहानी
देवी नागरानी

1/05/2011

न लोहा बन सके सोना

वो पारस क्या जिसे छूकर
न लोहा बन सके सोना

विकारों मैं है मन मैला
शरीरों को है क्या धोना?

यह रिश्तों की बची है राख
नए फिर बीज क्यों बोना?

सजा कर दिल में बर्बादी
किया आबाद हर कोना

न ऐसी चाह रख दिल में
जहाँ पा कर पड़े खोना

ख़ुशी मातम मनाती जब
ग़मों को आ गया रोना

मुझे दे पाक दिल मौला
न धन मांगूँ न मैं सोना

यह जीवन कैसा है देवी
सलीबों को जहाँ ढोना
देवी नागरानी

1/02/2011

जीवन एक पहेली

जीवन का है अर्थ अनोखा
फिर बिन अर्थ बिताए क्यों ?

बसँत ऋतू में बहार आई
फिर कलियाँ मुरझाए क्यों ?

घनी है जीवन पेड़ की छाया
नीरस पल फिर आए क्यों ?

देह विदेह के अँतर घट में
घने अँधेरे छाए क्यों ?

रचना की सुँदरता में ये
कुरूप पल है आए क्यों ?

सुलझी है हर गुत्थी फिर भी
उलझन के ये साए क्यों ?

कोयल स्वयँ तो काली काली
मीठी कूक सुनाए क्यों ?
देवी नागरानी

12/25/2010

कहीं है प्यार आता क्यों ?

चले जिस राह पर बरसों
उन्हें अनजान पाता क्यों ?

कहीं गैरों में अपनापन
कहीं अपना न भाता क्यों ?

बना जो ग़ैर है अपना
उसे फिर से बुलाता क्यों ?

कहीं नफ़रत न कर पाएँ
कहीं है प्यार आता क्यों ?

छलक पड़ते जो आसूँ वो
तू मुझसे है छुपाता क्यों?

खड़ी जिस शाख पर देवी
वहीं आरी चलाता क्यों ?
देवी नागरानी