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4/26/2026

मेरी छत, मेरी छत

निगाहों से कोई तो ढूंढो मेरी छत


अरे कोई ढूंढो मेरी छत, मेरी छत



चली जाने कैसी विदूषित हवाएं

उड़ा कर चली वो मेरी छत, मेरी छत



पनाह पा रहा था जो दामन वहीं पर

उड़ा कर चली वो मेरी छत, मेरी छत



बुने ताने बाने जो अहसास के वो

उड़ा कर चली वो मेरी छत, मेरी छत



जो पलकों पे अश्कों के मोती बिखेरे

बहा कर चली वो मेरी छत, मेरी छत


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