ये सागर पानी पानी है
लहर हर इक कहानी है
लहर आए लहर जाए
अजब सी ये रवानी है
उमड़कर बाँध तोडे जो
उसे कहते जवानी है
जो समझे झूठ को है सच
वही दुनियाँ दिवानी है
क्षितिज के पार दुनियाँ इक
हमें भी तो बनानी है
तिलस्मि सारी ये दुनियाँ
यही क्या जिँदगानी है?
देवी नागरानी
जीवन के तट पर-मेरे मन की सइरा में सफ़र करते जब मेरे पाँव थक जाते हैं तब कलम का सहारा ले कर शबनमी सपने बुनने लगती हूँ. प्यास की आस बंध जाती है, सफर बाकी कुछ और.... सिर्फ थोड़ा और.....
12/14/2010
आई है ख़ुशियों की भोर
बाळ गीत
मस्त फ़िजाँ मेँ भीनी भोर
ख़ुशबू देती चारों ओर
बादल गरजे घनघन घन घन
छाई घटा कारी घन घोर
रिमझिम रिमझिम पानी बरसे
प्यासा मोर मचाए शोर
कळ कळ कळ कळ पानी बहता
प्यास बुझाए प्यासे ढोर
ऊँची उड़ान भरे मन ऐसे
जैसे पतँग की कोई डोर
मदमाती मस्ती है देवी
आई है ख़ुशियों की भोर
देवी नागरानी
मस्त फ़िजाँ मेँ भीनी भोर
ख़ुशबू देती चारों ओर
बादल गरजे घनघन घन घन
छाई घटा कारी घन घोर
रिमझिम रिमझिम पानी बरसे
प्यासा मोर मचाए शोर
कळ कळ कळ कळ पानी बहता
प्यास बुझाए प्यासे ढोर
ऊँची उड़ान भरे मन ऐसे
जैसे पतँग की कोई डोर
मदमाती मस्ती है देवी
आई है ख़ुशियों की भोर
देवी नागरानी
11/16/2010
अमीरी में न गम होता
अगर सूरज सदा सोता
कहाँ रौशन जहाँ होता
खरीदी जाती गर खुशियाँ
अमीरी में न ग़म होता
अगर मिल जाता खाने को
न कोई भूख से रोता
किसी को होती चिँता क्यों
सुकूँ की नींद वो सोता
परेशानी, पशेमानी
वो है पाता जो है बोता
लगे चिँता चिता उसको
लगाए इसमें जो गोता
ये इन्साँ बैल है देवी
जिसे जीवन ने है जोता
देवी नागरानी
कहाँ रौशन जहाँ होता
खरीदी जाती गर खुशियाँ
अमीरी में न ग़म होता
अगर मिल जाता खाने को
न कोई भूख से रोता
किसी को होती चिँता क्यों
सुकूँ की नींद वो सोता
परेशानी, पशेमानी
वो है पाता जो है बोता
लगे चिँता चिता उसको
लगाए इसमें जो गोता
ये इन्साँ बैल है देवी
जिसे जीवन ने है जोता
देवी नागरानी
11/09/2010
भूखे को तुम रोटी दे दो
मोटी हो या दुबली दे दो
दादी माँ को पोती दे दो
पेट नसीहत से न भरेगा
भूखे को तुम रोटी दे दो
बिन पानी के प्यासे पौधे
उनको जल की लोटी दे दो
बाल नहीं हैं जिनके सर पर
उनको लंबी चोटी दे दो
फुटपाथों पर जो रोते हैं
उनको छोटी खोली दे दो
झूठ और सच को परखे ‘देवी’
ऐसी एक कसौटी दे दो
देवी नागरानी
दादी माँ को पोती दे दो
पेट नसीहत से न भरेगा
भूखे को तुम रोटी दे दो
बिन पानी के प्यासे पौधे
उनको जल की लोटी दे दो
बाल नहीं हैं जिनके सर पर
उनको लंबी चोटी दे दो
फुटपाथों पर जो रोते हैं
उनको छोटी खोली दे दो
झूठ और सच को परखे ‘देवी’
ऐसी एक कसौटी दे दो
देवी नागरानी
3/07/2008
तितली उड़ी
तितली उड़ी, बस में चढ़ी
सीट नहीं मिली
ड्राइवर ने कहा
आजा मेरे पास
तितली बोली " हट बदमास"
मैं तो चली वापस आकाश.
प्रसुतकर्ताः
स्तुति शर्मा
सीट नहीं मिली
ड्राइवर ने कहा
आजा मेरे पास
तितली बोली " हट बदमास"
मैं तो चली वापस आकाश.
प्रसुतकर्ताः
स्तुति शर्मा
सोनाली
12/21/2007
ये नया साल देखो चला आ रहा
नया साल २००८
ये नया साल देखो चला आ रहा
मुस्कराकर पुराना चला जा रहा.
बीत कर जो गया वो हमारा था कळ
आज खुशियाँ समेटे नया आ रहा.
है खुशी का नजारा यहाँ हर तरफ
खिलखिलाहट सभी को सुनाता रहा.
घूँट खुशियों के पीता रहा हर कोई
गीत खुशियों भरे दिल ये गाता रहा.
है फिजाँ शोख उसमें है शामिल खुशी
जाम से जाम है वक्त टकरा रहा.
हो मुबारक खुशी, अळविदा ग़म तुम्हें
दिल दुआओं को देवी है छलका रहा.
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