जीवन के तट पर-मेरे मन की सइरा में सफ़र करते जब मेरे पाँव थक जाते हैं तब कलम का सहारा ले कर शबनमी सपने बुनने लगती हूँ. प्यास की आस बंध जाती है,
सफर बाकी कुछ और....
सिर्फ थोड़ा और.....
जीवन के तट पर-मेरे मन की सइरा में सफ़र करते जब मेरे पाँव थक जाते हैं तब कलम का सहारा ले कर शबनमी सपने बुनने लगती हूँ. प्यास की आस बंध जाती है,
सफर बाकी कुछ और....
सिर्फ थोड़ा और.....
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2/17/2011
मेरे बचपन का अक्स
मेरी पोती निकिता नागरानी
गुड़िया रानी, गुड़िया रानी
तू क्यों भई उदास
बन संवर कर आज है जाना
तुझे पिया के पास
देवी नागरानी
haan guiya rani ... bahut hai pyaari
ReplyDeletenikita ko hamari or se dher sara pyar .
ReplyDeleteNikita bahut kush hui apni tasveer dekhkar. AApka ka aabhaar.
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