
रिशतों में है सौदेबाज़ी
कोई नहीं है किससे राज़ी.
तुम गर सेर सवा मैं भी हूँ
समझो भल पर कम नहीं हूँ
तू मेरा मैं तेरा काजी
कोई नहीं है किससे राज़ी
"तेरा मेरा" करके बढ़ाई
दिल में दरार की यह खाई
इक दूजे के वो सौदाई
कोई नहीं है किससे राज़ी
नहीं शिकायत शिकवा कोई
कौन यहाँ है दिलबर देवी
लुटी लुटी है सारी खुदाई
कोई नहीं है किससे राज़ी
देवी नागरानी
कोई नहीं है किससे राज़ी.
तुम गर सेर सवा मैं भी हूँ
समझो भल पर कम नहीं हूँ
तू मेरा मैं तेरा काजी
कोई नहीं है किससे राज़ी
"तेरा मेरा" करके बढ़ाई
दिल में दरार की यह खाई
इक दूजे के वो सौदाई
कोई नहीं है किससे राज़ी
नहीं शिकायत शिकवा कोई
कौन यहाँ है दिलबर देवी
लुटी लुटी है सारी खुदाई
कोई नहीं है किससे राज़ी
देवी नागरानी
तुम गर सेर सवा मैं भी हूँ
ReplyDeleteसमझो भल पर कम नहीं हूँ
bilkul sachchi baat
रिशतों में है सौदेबाज़ी
ReplyDeleteकोई नहीं है किससे राज़ी.
ek kadve sach ko bakhoobi likh di hai aapne.
aaj ke rishton ki kalai kholti aapki kavita dil ko choo gayi .aabhar
ReplyDeleteरिश्तों की सचाई बयाँ कर दी आपने.
ReplyDeleteबहुत ही बढ़िया
Yeh Hamari aut tumhari duniya ka nagn satya hai. aaapki pratikriya ke liye bahut bahut aabhar
ReplyDeleteतुम गर सेर सवा मैं भी हूँ
ReplyDeleteसमझो भल पर कम नहीं हूँ
bilkul sachchi baat
"तेरा मेरा" करके बढ़ाई
ReplyDeleteदिल में दरार की यह खाई
वाह..क्या खूब लिखा है आपने।