जीवन के तट पर-मेरे मन की सइरा में सफ़र करते जब मेरे पाँव थक जाते हैं तब कलम का सहारा ले कर शबनमी सपने बुनने लगती हूँ. प्यास की आस बंध जाती है,
सफर बाकी कुछ और....
सिर्फ थोड़ा और.....
जीवन के तट पर-मेरे मन की सइरा में सफ़र करते जब मेरे पाँव थक जाते हैं तब कलम का सहारा ले कर शबनमी सपने बुनने लगती हूँ. प्यास की आस बंध जाती है,
सफर बाकी कुछ और....
सिर्फ थोड़ा और.....
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1/22/2011
निकिता नागरानी
जन्म: २0 may 2006
एक गुडिया रानी थी लगती बड़ी सायानी थी हाथ से सबकुछ छीने ऐसे कौवों की वो रानी थी
kitti pyaari gudiya rani
ReplyDeleten loha ban sake sona '... apni yah rachna vatvriksh ke liye bhejiye rasprabha@gmail.com per parichay tasweer blog link ke saath
ReplyDeletemanmohak gudiya hai.
ReplyDeleteMeri Poti bahut khush hai apni tasveer dekhkar. Aapka bahut bahut aabhaar Mridula ji evam Rashim ji
ReplyDeleteसुन्दर भावाभिव्यक्ति बधाई .
ReplyDeleteHappy Republic Day..गणतंत्र िदवस की हार्दिक बधाई..
ReplyDeleteMusic Bol
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